Sunday, December 17, 2017

गुजरात

दोस्तों, हर चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होता है। हर चुनाव किसी एक राजनीतिक विचारधारा को शक्ति प्रदान करता है, चाहे वह शक्ति छोटी हो या बड़ी।
अभी उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों में सूपड़ा साफ होने के बाद कांग्रेस के नेताओं ने कहा, कि उन्होंने नगरीय निकाय चुनावों को गंभीरता से नहीं लिया। यह छोटे चुनाव हैं, उनका ध्यान बढ़े चुनावों की तरफ है। इसका अर्थ यह हुआ कि जमीन से जुड़े छोटे लोगों को, पंचायतों को, नगरपालिकाओं को, नगर निगमों को, पार्षदों को वह कुछ समझते नहीं हैं। उनके लिए अपनी शक्ति या अपना दमखम खर्च नहीं करना चाहते। यह बहुत ही बेवकूफाना बयान था.. खैर, कांग्रेस से समझदारी की उम्मीद भी कहां की जा सकती है। अब तो उनके अध्यक्ष भी जगप्रसिद्ध राहुल गांधी हैं।
हां तो यहां चर्चा गुजरात चुनाव की होनी है। हमारे मीडिया वाले हर चुनाव को जीने मरने के सवाल जितना कठिन बना देते हैं। उत्तर प्रदेश का चुनाव हो, दिल्ली का चुनाव हो या फिर गुजरात का। हर जगह मोदी जी की परीक्षा, भाजपा की परीक्षा, मोदी लहर का बढ़ना या घटना। दूसरे किसी की परीक्षा कभी नहीं ली जाती या फिर वह सारे मीडिया वाले भी राहुल गांधी और अन्य से कोई उम्मीद नहीं रखते। कल सवेरे का नतीजा जो भी हो, अच्छा ही रहेगा।
कांग्रेस ने बुरी चीजों को अपनाने की आदत छोड़ी नहीं है। चाहे वह अंग्रेजों से "बांटो और राज करो" की राजनीति हो, चाहे देशद्रोही कन्हैया जैसे लोगों को गले लगाना हो या जाति की राजनीति करने वाले हार्दिक पटेल जैसे नेताओं की उंगली पकड़कर चुनाव लड़ना हो। जहां बुराई - वहां कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को पूरे भारत को स्वच्छ करने की ज़िद चढ़ी है, तो इतनी बड़ी बुराई और गंदगी अगर कांग्रेस में है, तो कांग्रेस को यदि साफ किया जा रहा है तो बुरा क्या है?
पिछले कई दशकों से लूट-खसोट करते-करते राजनीतिक पार्टियां और नेता, उनका जो पतन हुआ तो हुआ, हमारा और आपका भी इन्होंने बहुत नुकसान किया, बहुत आदतें बिगाड़ी हमारी। हेलमेट पहन कर चलना हो या फिर समय पर टैक्स देना हो या फिर जितना कमा रहे हैं उस में पारदर्शिता लाना हो, हर बात पर हमको कष्ट हो रहा है। क्योंकि पहले खुली छूट थी चोरी करने की। कांग्रेस कहती थी हम भी खाएं आप भी खाओ, सब खुश रहें, देश का बुरा होता हो तो होता रहे। भारतीय जनता पार्टी चाहे 100 गलतियां जाने अनजाने में करें, पर देश का नुकसान करने वाला कोई भी काम भाजपा ने ना कभी किया है, ना कभी करेगी। गुजरात की जनता की पहचान समझदार, व्यापार की समझ रखने वाले, सफाई पसंद और सबसे बड़ी बात सच से प्यार करने वाले लोगों से है। और सच और कांग्रेस का दूर दूर तक कोई नाता नहीं है। इसीलिए परिणाम विपरीत आए इसकी संभावना बहुत कम है।
बहुत समय तक एक ही दल की सरकार रहे, तो बहुत से मौसमी मतलबी लोग पाला बदलकर आ जाते हैं। देखिए, सारे दलों में ये हैं तो हमारे भारत के लोग ही, हम और आप में से ही हैं जो निचले स्तर पर किसी भी पार्टी से जुड़ते हैं। निचले स्तर पर कुछ लालची, कुछ बुरे लोग यहां वहां सब जगह है, पर ऊपरी स्तर पर, जहां बड़े निर्णय लिए जाते हैं, जहां बड़ा फायदा नुकसान हो सकता है, जब भी कोई भी राजनीतिक निर्णय लेना हो तो जड़ को देख कर लेना होगा.. कि आप अगर एक सरपंच भी चुन रहे हो तो वह मजबूत किसको कर रहा है, एक पार्षद भी चुन रहे हो तो मजबूत किसको कर रहा है.. कहीं ना कहीं हमें हमारी सोच का विस्तार करना होगा। कल भाजपा की जीत की शुभ खबर की शुभकामनाओं के साथ, नमस्कार

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