Thursday, April 28, 2011

Autobiography of Bharat Varsh.. Written in 2050

Part of my new article, still incomplete..

1)
"मेरी समृद्धि देख लुटेरी प्रजातियों ने मुझपर आक्रमण करने शुरू किये. यह वो समय था जब गुप्त साम्राज्य समाप्ति पर था और अरब में मुस्लिम कबीलों की शक्ति बढ़ रही थी. तुर्किश आतातायी ग़ज़नी ने काबुल पर कब्ज़ा कर मुझपर लगातार हमले करने शुरू कर दिए. राणा प्रताप जैसे वीर राजाओं ने दर्जनों बार मुगलों को बुरी तरह हराया, पर सहृदय होने के कारण हर बार मुगलों को दया कर छोड़ दिया, इस भूल का नतीजा अंततः उनकी हार से हुआ. कहा जाता है कि मुग़ल मुख्यतः भारत इसलिए आते थे क्योंकि वो सनातन धर्म को अपना दुश्मन मानते थे. इसी कारण जहाँ जहाँ सनातन धर्म के मंदिर थे, वहां वहां उन क्रूर लुटेरों ने पहले हमला कर मंदिरों को तोड़ा और लूटा. जब सोमनाथ का मंदिर तोड़ा गया, तब लगभग 50,000 हिन्दुओं ने उसकी रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया. "

2)"मेरी गौरवशाली गाथा सम्राट भरत और चन्द्रगुप्त से है, अशोक से है, महाराजा रघु से है, शिवाजी से है. लाखों वर्ष के इतिहास में एक भी उदहारण ऐसा नहीं है कि भारत ने कभी किसी अन्य देश पर आक्रमण किया हो या उसका दमन - शोषण किया हो.. पर सभी देश भारत नहीं होते, सभी धर्म सनातन नहीं होते."

3) "अंग्रेजों की देन हमारा जन्मजात शत्रु - पाकिस्तान, अपने जन्म के साथ ही भारत के लिए सबसे बड़ा शत्रु बन गया. मैं भारत, अपनी स्वाधीनता को अच्छे से समझ भी नहीं पाया था कि मेरे शीश कश्मीर के बारामुला नगर में पाकिस्तानियों ने और अफगानी लुटेरों ने आक्रमण कर दिया. यह लुटेरे ट्रकों में आये थे. इन्होने वहां एक दिन में इतने अत्याचार किये कि मेरा दिल टूट गया. हर आदमी को मार डाला गया, हर स्त्री का सतीत्व लूटा गया, जो भी लूट लायक मिला वो ट्रकों में भर के पाकिस्तान ले गए. देश में राज्यों का अधिग्रहण का काम चल ही रहा था, पर कश्मीर के महाराजा ने अभी तक विलय नहीं किया था. पर इस बर्बर हमले को देख कर रात को ही महाराजा रणजीत सिंह ने पूर्ण विलय की कार्यवाही पूरी करी. अगली सुबह वायुसेना के हमलों से पाकिस्तानी उलटे पाँव वापस भागे. पर हमारे प्रधानमंत्री ने युद्ध विराम कि घोषणा करते हुए कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र के हवाले कर दिया, कि हमारे देश का मामला आप सुलझाओ. हम युद्ध जीत गए थे, पर हारी हुई धरती पाकिस्तान के पास रहने दी कि संयुक्त राष्ट्र इसका निर्णय करेगा. यह मुस्लिम वोट तुष्टिकरण नीति की पहली भूल थी. "

friends.. This article is being modified, edited & still being written. Your suggestions are always welcome & needed..

regards.. : Priyank

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