Sunday, April 14, 2024

तीसरा विश्वयुद्ध

वसुधैव कुटुम्बकम.. 

विश्वयुद्ध 3 की शुरुआत हो चुकी है..

रूस यूक्रेन, आर्मेनिया अजरबैजान, इस्राइल फ़िलीस्तीन लेबनान, इस्राइल ईरान..

चीन ताईवान, चीन जापान, रूस नाटो भी तैयार बैठे हैं। इस बार युद्ध बहुत कुछ बदलने वाला है। इस समय भारत को मजबूत, बहुत मजबूत रहना होगा। प्याज पेट्रोल के चक्कर में सरकार कमजोर नहीं होने देना है। 
400 पार तो करना ही है, इसके बाद उठाय जाने वाले कठोर निर्णयों का भी साथ देना है।
ये आर पार वाला युद्ध साबित होगा, और कम से कम 3-4 वर्ष चलेगा। 

जय हिंद, जय श्री राम 🙏 

Thursday, January 11, 2024

कम खाऊँ या सारा खा जाऊँ ❓

ऐसे कैसे खाना हो गया 

एक रोटी तो और ले लो 

चावल लोगे? मिठाई तो खानी ही पड़ेगी 

बहुत कम खा रहे हो आजकल 

यह कोई डाइटिंग करने की उम्र है क्या 


ऐसी बातें करके हम हमारे अपनों को ठूस ठूस कर खिलाते हैं, पर क्या हम जानते हैं कि अधिक भोजन फायदा कम नुकसान ज्यादा करता है 

आयुर्वेद कहता है कि जितनी भूख हो उससे कम खाओ, प्रकृति रहती है कि मनुष्य की प्रवृत्ति है सूर्यास्त होने के बाद हमें कुछ खाना नहीं चाहिए

 जबकि हम रात में रात 11 - 12 - 1:00 बजे तक पार्टी करते हैं, खाते हैं 

क्या आप जानते हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले पूरे भारत में इतना अच्छा अनुशासन था की सूर्यास्त के बाद कोई खता नहीं था, डिनर जैसी कोई चीज ही नहीं थी और प्रातः 4:00 बजे उठकर पहला भोजन सूर्योदय के साथ 6-7 बजे तक हो जाता था

 हमारे पेट का साइज आपको पता है कितना है? हमारी दोनों हथेलियां को जोड़ेंगे उसमें जितना भोजन आएगा वह हमारे पेट का साइज है। 

उससे ज्यादा हम अगर खाते हैं तो वह भोजन की नली में ही रुका रहता है तभी ज्यादा खाना खाने पर uneasy फील करते हैं, यह अच्छी बात थोड़ी है. 

जो खाना जो भोजन पचता नहीं है वह विश का काम करता है, तो क्या आप चाहते हैं कि अपने स्नेही जनों को जो आप इतने प्यार से भर भर के भोजन करा रहे हैं वह उनके लिए जहर जैसे कम करे? उनका स्वास्थ्य खराब करें? 

हम क्या खिला रहे हैं इस पर तो ध्यान देना ही चाहिए पर कितना मिला रहे हैं इस पर ज्यादा जोर नहीं देना चाहिए

 अगर छोटे बच्चे हैं तो एक हद तक उनको बोलना टोकना ठीक है, पर बड़ों को खाने में जबरदस्ती करना बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं 

यह बात आपके अपने ऊपर भी फिट बैठती है, हम हमारे पाचन तंत्र को हमारे पेट को हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम को हम कभी आराम ही नहीं देते। जब से पैदा हुए हैं तब से रोज खा रहे हैं

 मैंने अभी पिछले साल सतगुरु का एक वीडियो देखा था जिसमें उन्होंने यही बात कही थी कि हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम को आराम देना बहुत जरूरी है और उसके लिए भगवान ने एक दिन बनाया है, एकादशी का.. इस दिन हमें प्राकृतिक रूप से भोजन की आवश्यकता नहीं रहती

 हम बड़े आराम से बिना कुछ खाए पिए दिन भर रह सकते हैं तब से एक साल हो गया मैं हर महीने दो बार हर एकादशी में निराहार रहता हूं

 पूरा नियम तो फॉलो नहीं कर पता मगर 24 घंटे कुछ भी नहीं खाता, फलाहार भी नहीं फल भी नहीं 


धीरे-धीरे कोशिश करूंगा कि अगले दिन की सवेरे पारण तक इस नियम को ले जाऊँ.. 

इससे पहले मैंने कभी व्रत नहीं रखे, नवरात्रि में, शिवरात्रि में भी अगर आधे दिन का उपवास रख लो तो बुरी हालत हो जाती थी. 

मगर एकादशी में मेरे को कभी भी कोई दिक्कत नहीं आई, यहां तक की निर्जला एकादशी में बिना पानी पिए भी रात तक मैं आराम से ही था

 महाभारत main Shri Krishna Ne Matra Ek Dana चावल का खाकर पूरे संसार का पेट भर दिया था, हम क्यों इतना भर भर के खाते हैं 

और सबसे बड़ी बात है कि हमें हमारे शरीर की सुननी चाहिए 

उसे भूख लगी है कि नहीं 

उसे भोजन चाहिए? पानी चाहिए? जो लोग गिनती कर करके पानी पीते हैं इसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं.. यह  पश्चिमी एलोपैथी एक्सपेरिमेंट थे कि दिन में आपको 5 लीटर पानी 7 लीटर पानी पीना है

 इससे आपके शरीर में जो आवश्यक एलिमेंट्स होते हैं वह पानी के साथ बह जाते हैं, निकल जाते हैं. 

राजीव दीक्षित जी ने कहा है की पानी आप अच्छे से पियो मगर बार-बार नहीं

 भले ही आप दिन में चार बार पिओ दो-दो गिलास पी लो, मगर हर आधे घंटे में पानी पी रहे हो तो यह अच्छी बात नहीं इसके लिए भी फिर कह रहा हूं की लकीर के फकीर ना बने, अपने शरीर की सुनें। जब प्यास लगे तब पिए बस नियम बांधकर कि हमको पानी पीना ही है एक बोतल खत्म करनी है इस पर मत चले 

अंत में ध्यान रखें, कम खाने वाला कभी बीमार नहीं पड़ता

 नमस्कार

Saturday, March 30, 2019

बुरा ना मानो पप्पू है?

बुरा ना मानो पप्पू है..

राउल विंसी, राउल का पहला राजनैतिक गुरू लालू यादव था। लालू यादव जिसने जीवन भर मसखरे की छवि बनाकर कर अपने बड़े बड़े भ्रष्टाचार और गलतियों को छुपाए रखा। सब उसको जोकर की तरह लेते थे और वह अपना उल्लू सीधा करता रहा। गुरु ने चेले को भी वैसे ही तैयार किया। राहुल विंसी भी पप्पू की छवि बना कर धीरे धीरे कांग्रेस का अध्यक्ष बन गया। यह किसी पप्पू का काम नहीं है, इसके लिए बहुत धूर्तता चाहिए। जिसके लिए यह परिवार मशहूर है।

बदलते परिदृश्य में जब केजरीवाल राजनीति में उभरा, तब  राउल ने अपना गुरु बदल लिया और झूठ बोलने में महारत हासिल कर ली।

ऊपरी दिखावे पे यह कुछ भी बन जाए, पर  भीतर से बहुत घाघ है।

सब सोचते रहे कि बिना किसी मुद्दे के यह राफेल राफेल चिल्ला रहा है पर ये अकारण नहीं था, हजारों करोड़ की दलाली मिलती यदि यह सौदा निरस्त हो जाता।
बिना कोई घोटाला साबित हुए सबसे ईमानदार प्रधानमंत्री को चोर बोल रहा है, तो यह सब अकारण नहीं है। अरे जिस नरेंद्र दामोदरदास मोदी का ना कोई घर है, ना बीवी ना बच्चा, वो क्या भ्रष्टाचार करेगा। जो अपनी तनख्वाह तक दान कर दे, ऐसे संत पुरुष, भारत माता के सपूत को चोर बोलते हो तेरे पे तो हर भारतीय को एक एक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराना चाहिए। धिक्कार है तेरे पर।

इसका मुख्य सलाहकार सैम पित्रोदा, जिसने अभी अभी पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर पाकिस्तान को आतंकवाद पर क्लीन चिट दी। ना सिर्फ पुलवामा हमले पर, बल्कि मुंबई हमले पर भी। यह भी जुबान की फिसलन नहीं थी.. सोची समझी साजिश के तहत विदेशों में फैले हुए भारत के दुश्मनों से कांग्रेस के लिए धन बल की सहायता और समर्थन हासिल करने का एक और देशद्रोही तरीका था।

यह पोस्ट लिखने का एक ही आशय है, कि राउल विंसी जिसको भारत के वोटर राहुल गांधी के नाम से जानते हैं उसको पप्पू समझने की भूल ना करें। नाही भारत के भक्त और भाजपा समर्थक पप्पू को पप्पू बोले, क्योंकि इससे उसके पाप थोड़े हल्के लगते हैं।

बल्कि उसको राहुल गांधी भी ना बोले। जो नाम उसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान है - राउल विंसी, उसको इसी नाम से बुलाया जाए

भारत माता की जय।।

#raulvinci #rahulgandhi #chorUPA #congress #elections #Modi #Bharat #trustBJP #BJP #PST #JABALPUR #pappu #fail

Sunday, January 6, 2019

विचारधारा

आवश्यक नहीं कि मैं संघ और भाजपा समर्थक हूं तो मैं ही सही हूं, कहीं कोई कांग्रेसी या शिव सैनिक भी सही हो सकता है। अपनी सोच दूसरे पर थोपना अच्छी बात नहीं, दूसरे की सोच का भी सम्मान होना चाहिए। अपनी विचारधारा पर गर्व करना अच्छी बात है, पर दूसरे की विचारधारा को नीची दृष्टि से देखना गलत बात है। दूसरे दल का विरोध तभी करें जब आप उसको भलीभांति जानते हों। सतही जानकारी लेकर कुछ भी तर्क देना गलत बात है। और यदि आप अपनी विचारधारा को अच्छी तरह जानते समझते हैं, तो आप किसी दूसरे की विचारधारा की बुराई कर ही नहीं सकते।
आप अपने पथ पर अच्छे काम करें, दूसरे अपने पथ पर चलकर देश सेवा करें। हां, राष्ट्र के अहित का कोई भी कार्य कहीं भी हो रहा हो, चाहे वह स्वयं की पार्टी द्वारा हो या दूसरे की पार्टी द्वारा, उसका विरोध हर प्लेटफार्म पर तत्काल किया जाना चाहिए। राजनीति और राष्ट्र नीति के बीच रेखा खींचनी आवश्यक है।
सभी उम्मीदवारों को विधानसभा चुनावों के लिए शुभकामनाएं, वंदे मातरम् ..

#MP #elections #candidates #BJP #TRUSTBJP #congress #rahulgandhi #Modi #JABALPUR #Bharat #PST

Tuesday, August 7, 2018

Human Life & its value

Ever heard of an animal or bird committing suicide? Na, they value life. For them each day is survival. To search /hunt food, to save themselves from being killed by other animals.

Whatever comes easy is not valued. Whatever comes cheap is not respected. Our society, with time have generated the habit of saving for future generations. This is the root cause of most of our troubles. By this we spoil our life as well as our children's life.

What will happen if a tiger saves his kill for his cubs for when they grow up? Will they ever take the trouble to learn hunting? In case of emergency, will they be able to hunt? No, they'll die of hunger. This happens with humans, this is happening with us.

Sole teaching of life from our Religious books is to live each moment, not to worry about past or future, then why? Let's learn to fight, let's teach to fight. Not only for livelihood, but for our own development, for what we are born. Life is precious. It's time, we start taking lessons from animals..

Monday, December 25, 2017

क्रिकेट

कांग्रेस की गेंद बल्ला राजनीति.. चित भी मेरी, पट भी मेरी

Sunday, December 17, 2017

गुजरात

दोस्तों, हर चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होता है। हर चुनाव किसी एक राजनीतिक विचारधारा को शक्ति प्रदान करता है, चाहे वह शक्ति छोटी हो या बड़ी।
अभी उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों में सूपड़ा साफ होने के बाद कांग्रेस के नेताओं ने कहा, कि उन्होंने नगरीय निकाय चुनावों को गंभीरता से नहीं लिया। यह छोटे चुनाव हैं, उनका ध्यान बढ़े चुनावों की तरफ है। इसका अर्थ यह हुआ कि जमीन से जुड़े छोटे लोगों को, पंचायतों को, नगरपालिकाओं को, नगर निगमों को, पार्षदों को वह कुछ समझते नहीं हैं। उनके लिए अपनी शक्ति या अपना दमखम खर्च नहीं करना चाहते। यह बहुत ही बेवकूफाना बयान था.. खैर, कांग्रेस से समझदारी की उम्मीद भी कहां की जा सकती है। अब तो उनके अध्यक्ष भी जगप्रसिद्ध राहुल गांधी हैं।
हां तो यहां चर्चा गुजरात चुनाव की होनी है। हमारे मीडिया वाले हर चुनाव को जीने मरने के सवाल जितना कठिन बना देते हैं। उत्तर प्रदेश का चुनाव हो, दिल्ली का चुनाव हो या फिर गुजरात का। हर जगह मोदी जी की परीक्षा, भाजपा की परीक्षा, मोदी लहर का बढ़ना या घटना। दूसरे किसी की परीक्षा कभी नहीं ली जाती या फिर वह सारे मीडिया वाले भी राहुल गांधी और अन्य से कोई उम्मीद नहीं रखते। कल सवेरे का नतीजा जो भी हो, अच्छा ही रहेगा।
कांग्रेस ने बुरी चीजों को अपनाने की आदत छोड़ी नहीं है। चाहे वह अंग्रेजों से "बांटो और राज करो" की राजनीति हो, चाहे देशद्रोही कन्हैया जैसे लोगों को गले लगाना हो या जाति की राजनीति करने वाले हार्दिक पटेल जैसे नेताओं की उंगली पकड़कर चुनाव लड़ना हो। जहां बुराई - वहां कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को पूरे भारत को स्वच्छ करने की ज़िद चढ़ी है, तो इतनी बड़ी बुराई और गंदगी अगर कांग्रेस में है, तो कांग्रेस को यदि साफ किया जा रहा है तो बुरा क्या है?
पिछले कई दशकों से लूट-खसोट करते-करते राजनीतिक पार्टियां और नेता, उनका जो पतन हुआ तो हुआ, हमारा और आपका भी इन्होंने बहुत नुकसान किया, बहुत आदतें बिगाड़ी हमारी। हेलमेट पहन कर चलना हो या फिर समय पर टैक्स देना हो या फिर जितना कमा रहे हैं उस में पारदर्शिता लाना हो, हर बात पर हमको कष्ट हो रहा है। क्योंकि पहले खुली छूट थी चोरी करने की। कांग्रेस कहती थी हम भी खाएं आप भी खाओ, सब खुश रहें, देश का बुरा होता हो तो होता रहे। भारतीय जनता पार्टी चाहे 100 गलतियां जाने अनजाने में करें, पर देश का नुकसान करने वाला कोई भी काम भाजपा ने ना कभी किया है, ना कभी करेगी। गुजरात की जनता की पहचान समझदार, व्यापार की समझ रखने वाले, सफाई पसंद और सबसे बड़ी बात सच से प्यार करने वाले लोगों से है। और सच और कांग्रेस का दूर दूर तक कोई नाता नहीं है। इसीलिए परिणाम विपरीत आए इसकी संभावना बहुत कम है।
बहुत समय तक एक ही दल की सरकार रहे, तो बहुत से मौसमी मतलबी लोग पाला बदलकर आ जाते हैं। देखिए, सारे दलों में ये हैं तो हमारे भारत के लोग ही, हम और आप में से ही हैं जो निचले स्तर पर किसी भी पार्टी से जुड़ते हैं। निचले स्तर पर कुछ लालची, कुछ बुरे लोग यहां वहां सब जगह है, पर ऊपरी स्तर पर, जहां बड़े निर्णय लिए जाते हैं, जहां बड़ा फायदा नुकसान हो सकता है, जब भी कोई भी राजनीतिक निर्णय लेना हो तो जड़ को देख कर लेना होगा.. कि आप अगर एक सरपंच भी चुन रहे हो तो वह मजबूत किसको कर रहा है, एक पार्षद भी चुन रहे हो तो मजबूत किसको कर रहा है.. कहीं ना कहीं हमें हमारी सोच का विस्तार करना होगा। कल भाजपा की जीत की शुभ खबर की शुभकामनाओं के साथ, नमस्कार

Tuesday, December 5, 2017

औरंगज़ेब प्रथा के युवराज से चंद सवाल

राहुल जी आप सवाल बहुत करते हो।
भारत की जनता आप के परदादा से भारत के विभाजन और लाखों मौतों पर सवाल पूछती रही,  पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।  कश्मीर की समस्या पैदा करी, कोई जवाब नहीं दिया।  चीन और पाकिस्तान अवैध रूप से भारत की भूमि पर कब्जा कर के  बैठ गए, राहुल जी,  परदादा जी ने कोई जवाब नहीं दिया।
आपकी दादी जी ने तानाशाही दिखाई, इमरजेंसी लगाई,  आज तक माफी तक नहीं मांगी जवाब दूर की बात। पंजाब में आतंकवाद पनपने दिया, राहुल जी पर कोई जवाब नहीं आया।  आपके पिताजी जब सिखों का नरसंहार हुआ, तब उन्होंने कहा कि बड़ा वृक्ष गिरता है तो धरती तो हिलती ही है। राहुल जी ना माफ़ी आई ना जवाब आया।  भोपाल गैस कांड में एंडरसन को भगाया, बोफोर्स दलाली कांड.. जनता  जिसे आप प्रजा समझते हैं आज तक जवाब मांग रही है।
राहुल जी आपकी मम्मी, जिन्होंने रिमोट के द्वारा 10 वर्षों तक राज किया और अभूतपूर्व घोटालों के रिकॉर्ड  उनकी सरकार में कायम हुये,  जवाब कहां हैं राहुल जी?
और आप एक से एक बेतुके बच्चों वाले सवाल लेकर पहुंच जाते हैं राजनीति करने..
राहुल जी आप राजनीति कर रहे हैं, पर जनता मजे ले रही है..
आप जनेऊ धारण कर रहे हैं, पर जनता पूरा ड्रामा देख रही है और समझ रही है..
आप जाति और आरक्षण में  हिंदू धर्म को बांट रहे हैं, राहुल जी,  जनता कांग्रेस पर और क्रोधित हो रही है..
राहुल जी अब तो आप की ताजपोशी हो रही है, कांग्रेस के भले के बारे में सोचिए,  इस तरह से सवाल पूछना बंद कर दीजिए,  शायद कांग्रेस बच जाए। वैसे जीतेगी भाजपा ही ;)

#PST #JABALPUR #rahulgandhi #joke #pappu #congress #chorUPA #elections #trustBJP #BJP #Gujarat #Question   

Tuesday, October 17, 2017

शुभ दीपावली मित्रों

कैसे हैं दोस्तों,
मुझसे मेरे फेसबुक पेज "PST Priyank Singh Thakur" पर जुड़े रह  सकते हैं 🙏
जय श्री राम
वंदे मातरम् 

Saturday, January 25, 2014

Statue of Unity, Idea of India

Frankly speaking, unfortunately history has been written for the ruler & not for the Nation. Same is taught in text books to the children & thus in course influence the whole generation & generation after generation.

Mr nehru, let's 1st look at his background. Yes, that's important. Have you ever come across this nehru surname by any chance other than our esteemed jawahar Lal? Many say, that they were pathan (Muslim) settled in Kashmir. His grandfather used to work for a canal (neher), thus they derived this surname (nehru). You can find supporting articles on internet which luckily doesn't need HRD approval.
Desperate to be in power, nehru's father motilal, a very successful lawyer, made his son enter congress & a full time assistant of gandhi ji. In the process, motilal even launched a separate political party, which was short-lived. This background is very important to describe what & why we are penning down this article.

When, after world war 2, British were so economically weak that staying in Bharat was costing them more, they chose to quit on their own. They made Bharat their dominion state (not full independence, note that). By this time tension between Hindu - Muslim rose to its peak & muslim leader jinnah told British that he don't trust Hindus. He won't agree to be ruled by any Hindu leader & asked them to make him the prime minister or create a separate country for muslims. But nehru dreamt of becoming the pm himself. He was adamant to be the pm. This was the reason why Gandhi ji chose to stay at Kolkata & not Delhi at the time when decision on partition of our Nation was going on. He instead told nehru to ask Sardar Patel & follow his orders. Sardar clearly told nehru that if needed, make jinnah the pm but my Bharat will not be partitioned. But nehru told british that Sardar agreed for partition. Anyways, further we go.

British, cunning as always, knew that they've done so much damage to Bharat that if any stable & strong government comes in power, they'll soon ask for the loot back or may take some military action sooner or later. British dictated several conditions like 1) Bharat will be hence forth known as India 2) revenue from tea gardens, bridges, etc will continue for 100 years 3) freedom fighters like Subhash Chandra Bose to be handed over to the British whenever they are caught even by independent Bharat, 4) we will remain a commonwealth nation, etc.
To choose the pm, meeting of congress executive committee was called. Of the 15 members, just 1 voted for nehru & 14 voted for Sardar.
Devastated nehru ran to Gandhi ji & God knows what & how he convinced (managed) him. gandhi ji vetoed that nehru will be the pm.
One such condition of British was, on merging of princely states. They said, who ever wishes to be with Bharat or pakistan can merge as per their choice. Nawab of bhopal, hyderabad, etc opted to be with pakistan. Imagine, 10s of mini pakistan within Bharat & their free commuting all over. Can you even dream of its consequences? You know what, nehru agreed to this too.

Sardar, the reason why we awakened Bharatiya worship him is, he stood against nehru & overnight ordered our military to go & take over all such traitors. All this was executed within a month. The reason why kashmir is still an issue is also a gift by nehru. King of Kashmir, remember, was a Hindu king, was taking time to merge onto Bharat. Within few days of independence afghani tribes along with Pakistani army attacked Kashmir. It was not just an invasion. Barbaric they were, Barbaric they remain.. Baramula, the then most prosperous city of Kashmir, was so badly looted, murdered & raped that no one, no one was bared. Horrified King called Sardar for immediate help & unconditional merger. That operation, as described by our army, is till date the biggest air lift operation by our Army that saved Kashmir. nehru thought that Sardar is taking away all credit & pakistan is crying in international community. nehru went to United Nations to intervene & sort the already settled matter. Because of which, the part which pakistan invaded, still remains with pakistan. nehru 's curse on Kashmir didn't stop with this alone. He, as directed by shekh abdullah, awarded Kashmir status of a country within a country. Kashmir was given a separate pm, a separate symbol, a separate constitution. Bharatiya nationals were required to get a permit (visa) to enter Kashmir. This law,  Shyama Prasad Mukherjee, founder member of Jansangh (now BJP), got abolished by sacrificing his life. Still, nehru managed to give article 370 to Kashmir to keep it isolated from mainstream Bharat.

Now, you dear readers decide, who played the major role in independence, in partition, in unifying of Bharat (present day Bharat, what we live in now) & in securing our Nation.. Gandhi, Sardar or nehru?
Statue of Unity, is the least we indebted Nationalists can do to pay our gratitude, our tribute to the architect of modern Bharat, Sardar Vallabh Bhai Patel.
Jai Hind 

Friday, January 17, 2014

Hum AAP ke con hain

इटली के रंग, खुद को रंग लिया आप ने, दूध पिलाते ही देखो डस लिया सांप ने,

इतना कमीनापन देखो अच्छा नहीं होता, देश द्रोही किसी का सच्चा नहीं होता,

पप्पू भी खुश, देखो शीला मुस्काई है, टोपी पहने ये भी कांग्रेस के भाई हैं,

काश्मीर को तोड़ो, नक्सल को जोड़ो, विघटन की सोच इन ने पाक से पाई है?

मुफ्त बिजली पानी का गुब्बारा फूटा, सरकार छोड़ो, क्या कभी रसोई चलाई है?

दिल्ली का ये मर्ज़ दिल्ली में दफन करो, दोस्तों इस बार दांव पर भारत माई हैं..
- प्रियंक

Friday, December 20, 2013

मैं भारत हूँ (part 1)

मैं भारत हूँ. 
समृद्ध, ऐतिहासिक, सम्पूर्ण, आध्यात्मिक भारत.

हजारों साल का इतिहास कहना छोटी बात होगी, मेरा अस्तित्व तो तब से है जब से मानवता बनी है.
मुझमे सभी देव वास करते हैं, मैं वो धन्य राष्ट्र हूँ. 

ऋषि मुनियों की धरती जहाँ चारों वेद लिखे गए, जहाँ कैलाश में भोलेनाथ का वास है, जहाँ विष्णु अवतार श्री राम और कृष्ण हुए. मैं वो कृतग्य राष्ट्र हूँ.

मेरी गौरवशाली गाथा सम्राट भरत और चन्द्रगुप्त से है, अशोक से है, महाराजा रघु से है, शिवाजी से है. 
लाखों वर्ष के इतिहास में एक भी उदहारण नहीं है कि भारत ने कभी किसी अन्य देश पे आक्रमण किया हो या उसका दमन - शोषण किया हो.. पर सभी देश भारत नहीं होते, सभी धर्म सनातन नहीं होते.

मेरी समृद्धि देख लुटेरी प्रजातियों ने मुझपर आक्रमण करने शुरू किये. यह वो समय था जब गुप्त साम्राज्य समाप्ति पर था और अरब में मुस्लिम कबीलों की शक्ति बढ़ रही थी. तुर्किश आतातायी ग़ज़नी ने काबुल पर कब्ज़ा कर मुझपर लगातार हमले करने शुरू कर दिए थे. राणा प्रताप जैसे वीर राजाओं ने दर्जनों बार मुगलों के बुरी तरह हराया, पर सहृदय होने के कारण हर बार मुगलों दया कर छोड़ दिया, इस भूल का नतीजा अंततः उनकी हार से हुआ. कहा जाता है कि मुग़ल भारत इसलिए आते थे क्योंकि वो सनातन धर्म को अपना दुश्मन मानते थे. इसी कारण जहाँ जहाँ सनातन धर्म के मंदिर थे, वहां वहां उन क्रूर लुटेरों ने पहले हमला कर मंदिरों को तोड़ा और लूटा. जब सोमनाथ का मंदिर तोड़ा गया, तब कहा जाता है 50,000 हिन्दुओं ने उसकी रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किये. फिर तो साल दर साल हमले होते गए, बाबर ने तो बर्बरता कि नयी मिसालें कायम करीं. अयोध्या का मंदिर तोड़ के वहां मस्जिद बनायीं. मथुरा में तो मंदिर के ऊपर ही मस्जिद बना डाली. हर हमले में लाखों निहत्थे लोग मारे जाते, स्त्रियों पे वर्णित न करने जैसे अत्याचार होते. 

मुगलों के घिनोने अत्याचारों के कारण ही भारत में बाल विवाह और सटी प्रथा जैसी कुरीतियाँ प्रारंभ हुईं. हमारी मातृशक्ति ने अपने सतीत्व कि रक्षा करने अपने प्राणों की आहुति दी. जलील जलालुद्दीन अकबर ने आर्य राजाओं को हराने के बाद उनको पूरे राज्य के साथ मुस्लिम धर्म अपनाने को कहा जाता, अन्यथा उस राजा को उसकी सेना समेत मार डाला जाता. पर भारत तब भी जीवित था, मैं तब भी यह काल का क्रूर खेल देखता रहा. पर अभी तो अत्याचार अपने चरम पे आने बाकी थे. मुग़ल यह समझ गए कि भारतीय अपने प्राण देने में नहीं हिचकते, पर वो अपना धर्म जीते जी नहीं छोड़ेंगे. औरंगजेब की तो मरते मरते यह इच्छा रह गयी थी कि वो भारत को पूर्णतः मुस्लिम देश नहीं बना पाया. तब तक व्यापारी लुटेरे अंग्रेज मेरी धन सम्पदा को लूटने दक्षिण से भीतर आ चुके थे. मुग़ल क्रूर थे तो अंग्रेज धूर्त. 

18वीं सदी तक अंग्रेज गंधार से बर्मा तक और तिब्बत से लंका तक मेरे सम्पूर्ण स्वरुप पर ब्रिटिश राज स्थापित कर चुके थे. मुग़ल भारत को मुस्लिम बनाना चाहते थे, तो ब्रिटिश ईसाई. पर जिस बेदर्दी से अंग्रेजों ने भारत को लूटा है, मेरी वैसी दशा किसी अन्य लुटेरे ने नहीं करी थी. अकेले कोलकता से २०० जहाज भर के सोना लूट के इंग्लैंड ले जाया गया था. मेरे वीर पुत्रों ने मुझे स्वाधीन करने बहुत संघर्ष किया. कहा जाता है कि लगभग एक करोड़ भारतीय बलिदान हुए अंग्रेजो से इस स्वाधीनता के आन्दोलन में. यह आंकड़ा 1857 से 1947 तक का ही है. मेरठ में आन्दोलन के बाद पूरे नगर के सभी आदमियों को (7 साल के बालक से ले कर 70 साल के वृद्ध ) बेरहमी से मार डाला गया. ऐसा ही क्रूरतम कृत्य हर उस नगर में हुआ जहाँ जहाँ आन्दोलन हुआ था. पर मेरे स्वाधीन भारत में क्या सिखाया जाता है? कि स्वाधीनता कि लड़ाई में चोरा-चोरी पुलिस थाने में 4 -5 पुलिस वालों को आन्दोलन कारियों ने मार डाला! अंग्रेजों के द्वारा मारे गए एक करोड़ भारतीयों का कोई जिक्र नहीं? क्यों न हो, इतिहास तो उन्ही ने लिखा है न. उन्ही की शिक्षा प्रणाली हम आज तक पढ़ और पढ़ा रहे हैं, तो कैसी शिकायत?

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजों की हालत बहुत पतली हो गयी और उनको भारत पे राज करना महंगा पड़ने लगा. तब उन्होंने अपने दुष्ट दिमाग की उपज से यह सोचा कि यदि भारत को स्वाधीन कर दिया जाए, तो यह पुनः शक्तिशाली बन कर हमारा शत्रु न बन जाए. इसलिए उन्होंने मेरा विभाजन कर दिया और धर्म के आधार पर मुस्लिम देश पाकिस्तान बना दिया. वो भी एक पाकिस्तान पूर्व दिशा में, एक पाकिस्तान पश्चिम दिशा में. और अंग्रेजी संस्कृति के पाले बढे कांग्रेसी नेता जवाहरलाल नेहरु को भारत का प्रधानमंत्री बना दिया. जी हाँ, ये वही नेहरु हैं जिन्होंने रामायण और महाभारत को काल्पनिक कथा कहा और जिन ने कहा कि मैं जन्म से हिन्दू हूँ पर कर्म से अंग्रेज. 

अंग्रेजों की देन हमारा जन्मजात शत्रु, पाकिस्तान, अपने जन्म के साथ ही भारत के लिए सबसे बड़ा शत्रु बन गया. मैं अपनी स्वाधीनता को अच्छे से समझ भी नहीं पाया था कि मेरे शीश कश्मीर के बारामुला नगर में पाकिस्तानियों ने और अफगानी लुटेरों ने आक्रमण कर दिया. यह लुटेरे ट्रकों में आये थे. इन्होने वहां एक दिन में इतने अत्याचार किये कि मेरा दिल टूट गया. हर आदमी को मार डाला गया, हर स्त्री का सतीत्व लूटा गया, जो भी लूट लायक मिला वो ट्रकों में भर के पाकिस्तान ले गए. देश में राज्यों का अधिग्रहण का काम चल ही रहा था, पर कश्मीर के महाराजा ने अभी तक विलय नहीं किया था. पर इस बर्बर हमले को देख कर रात को ही महाराजा रणजीत सिंह ने पूर्ण विलय की कार्यवाही पूरी करी. अगली सुबह वायुसेना के हमलों से पाकिस्तानी उलटे पाऊँ वापस भागे. पर हमारे प्रधानमंत्री ने युद्ध विराम कि घोषणा करते हुए कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र के हवाले कर दिया, कि हमारे देश का मामला आप सुलझाओ. हम युद्ध जीत गए थे, पर हारी हुई धरती पाकिस्तान के पास रहने दी कि संयुक्त राष्ट्र इसका निर्णय करेगा. यह मुस्लिम वोट तुष्टिकरण नीति की पहली भूल थी. 



(to be continued..)


Priyank Thakur

Saturday, December 15, 2012

गुजरात चुनाव 2012

नमस्कार, सबसे पहले तो आप सभी से क्षमा मांगता हूँ की एक वर्ष से अधिक समय तक कोई नया ब्लॉग पोस्ट नहीं लिखा। यहाँ की अनुपस्थिति को मैं ट्विटर पर पूरा कर रहा था।
गुजरात चुनाव चल रहे हैं, दोषारोपण और ढोंग अपने चरम पर हैं। जनता को सदैव की भांति मूर्ख बनाने का प्रयत्न चल रहा है, पर गुजरात की जनता सन 1995 से जाग चुकी है। कांग्रेस की सरकार  केंद्र में इतने गुल खिल चुकी है कि अब वो कितने भी घडियाली आंसू रोये, जागरूक मतदाता उसके बहकावे में आने वाला नहीं। नरेन्द्र मोदी जी को मौत का सौदागर कहने वाली सोनिया गाँधी अपने ऊपर खर्च किये गए यात्राओं के विवरण तक को देने से मना  करती है, वैसे उसके मना करने की नौबत तो तब आती जब उसके चापलूस उस तक बात आने देते। केंद्र सरकार ने सोनिया गाँधी के आयकर तक की जानकारी को गुप्त रखा है। क्यों भला? स्वयं पर बात आये तो मामला निजी हो जाता है, कोई निर्णय लेना हो तो मैडम निर्णय लेती हैं! प्रधानमंत्री तक उनके निवास जाते हैं। और तो और विदेश में उनको, उनके बच्चों को, दामाद तक को सरकारी मेहमान का दर्ज मिलता है। ये हाल तो मैंने तानाशाहों के लिए सुने थे, सुना तो ये भी था की भारत में लोकतंत्र है, कांग्रेस लोकतान्त्रिक पार्टी है? जनता गलतियाँ करती रहती है, भोली है, मासूम है, बहकावे में आ जाती है, भावुक हो जाती है। तभी तो हमारे गृहमंत्री कहते हैं की हमारे वोटर सारे भ्रष्टाचार चुनाव आते आते भूल जायेंगे! इतना दंभ और घमंड तो सिकंदर को भी नहीं रहा होगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग बदतर हाल में हैं, यदि किसी को नर्क के रास्तों का अनुभव करना हो तो वो मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग पर 100 किमी चल के दिखाए। संयोगवश अभी राजस्थान यात्रा का योग बना, वहां के राष्ट्रीय राजमार्ग शानदार हाल में हैं, मप्र के साथ ऐसा सौतेला व्यव्हार क्यों? जहाँ बीजेपी का शासन हो वहां की जनता भारत की न हो कर पाकिस्तान की हो जाती है क्या? अरे, ये मैंने क्या लिख दिया! पाकिस्तान तो हमारी सरकार  के लिए भारत से भी बढ़ कर है। कांग्रेस के 42 वर्षीय युवराज तो भारत पाकिस्तान युद्ध में भारत का समर्थन करने के लिए एहसान जता चुके हैं। अभी पाकिस्तानी गृहमंत्री का जन्मोत्सव ताजमहल में मानाने का काम स्वयं हमारे गृहमंत्री कर रहे हैं। और तो और शिंदे साब कह रहे हैं की पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलो, मुंबई हमले & कश्मीर में मारे गए लाखों देशवासियों की वीरगति भूल जाओ।
कुछ हो, गरीबों को अपना वोट कांग्रेस को ही देना चाहिए, गरीबों का अस्तित्व ही कांग्रेस के कारण है। न कांग्रेस होती, ना वो गरीब होते।
खैर, 15 महीने बाद ब्लॉग लिख रहा हूँ और कांगेस की बात ले के बैठ गया। इस गलती के लिए पुनः क्षमा मांगता हूँ :P
जय हिन्द, जय भारत

Friday, September 30, 2011

एक वोट की कीमत इस देश का भविष्य है


एक वोट की कीमत इस देश का भविष्य है.. 
एक वोट जिसके लिए हम देशभक्त चिंतित रहते हैं कि ग़लत पार्टी के पक्ष में मत न पड़ें, वो वोट ५० रुपये में बिक जाता है.
एक वोट जिसको एक गरीब अज्ञान पाँच साल में एक बार मिलने वाली शराब की बोतल और दावत समझता है.
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भारत माँ के विकास के आगे सबसे बड़ा सवाल और सबसे बड़ी समस्या यह बिका और बहका हुआ "एक वोट" ही है. आपके , मेरे और हमारे राष्ट्रपति - प्रधानमंत्री का वोट भी उस अनपढ़ - अज्ञान के वोट के बराबर है जो इन भ्रष्ट राजनेताओं के जाल में आ जाते हैं. मैं रोटरी क्लब का पुराना सदस्य हूँ, वहाँ भी जब चुनाव होते हैं तो हर क्लब को उसके आकार और क्षमता के आधार पर वोट करने की ताकत मिलती है..जबकि देश चलने के लिए जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया है.
उसमे देश में बस जन्म लेना ही एक योग्यता है, और हर कोई बराबर का योग्य है...
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जरा सोचिये, इस प्रारूप पर यदि एक डॉक्टर या इंजिनियर को 4 वोट, ऍम. बी. ऐ / टीचर / स्नातक को 3 वोट , १२ वी पास को 2 वोट, और बाकी सबको १ वोट डालने को मिलें, तो क्या ये छोटी मोटी मौकापरस्त क्षेत्रीय पार्टी पनप पातीं ? तब क्या ये रेल में भर भर के रैली निकलतीं ? क्या ये मोल-भाव कि राजनीति होती ?
ये एक गंभीर विषय है जो पूरे भारत का भविष्य बदल देगा , प्रजातंत्र में एक गुणवत्ता लाएगा.
पर ये बस सोचने से नही होगा..
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जैसे में अपने दिन में से २ घंटे राष्ट्र के हित में सोचने में समर्पित करता हूँ, आप सब भी अगर ये भाव जगाएं तभी हम इस ओर एक कदम बढ़ सकेंगे.
यह एक सुझाव नहीं, एक विचार मात्र है. हम सभी इस दिशा में एक बार सोचना तो प्रारंभ करें, एक से एक विचार जन्म लेंगे और भारत फिर मुस्कुराएगा.और भारत जो मुस्काया तो विश्व भी मुस्काये बिना नहीं रहेगा. भारत की आदत ही पुरानी है, की हम तभी प्रसन्न रहते हैं जब सारे प्रसन्न रहें.
          जय भारती...
                                 जय श्री राम..
                                                         जय हिंद...
                                                                             प्रियंक..
                                                         
                                                                             ashithakur@yahoo.co.in

Wednesday, September 28, 2011

Goal

There is a goal for everything, every existing living creature has a goal. Every game has a goal, every action has a motive, every Life has a goal.. What? This we never thought of, did we? Naa.

I Bet, 99.9% of existing population never even cared to think about this topic, or may be it scares them. Human nature always avoids topics that are tough or beyond their reach. But to be successful we must accept challenges & search for the unanswered questions. Many people have a single principle, to live each day & save for the future. This is the best policy as far as worries are concerned, to live in present, but living without giving Life a thought is bad. Life of Humans is very different & too important to live like other living beings. We are not only born to survive or gain power, but the extra ability that we have is to gain knowledge & enhance our intelligence. But many think that didn't we learned enough in our school & college? Naa. Learning leads to education, where as Knowledge comes from experience & thinking. Even an animal teaches its kid to hunt, heal, hide & escape. Humans have this ability to think & learn. Why this knowledge is so important that we are emphasizing so much on it? and above all WHAT is this knowledge? This complicated question according to me has a single answer - Learning about our existence is the biggest knowledge. Our existence means Who are we, What are we, Why are we? Now, answers to these questions may differ from person to person, each time with experience when you ask these questions to your self, you'll get different answers.

When we are able to get all answers to all our questions, we can say that we are gaining knowledge. This alone is not your Goal, but gaining knowledge & implementing it practically in our Life will help you discover your goal and achieve it. This is not complicated at all. Easiest way to coach yourself is to give yourself some time. Away from other people, away from mobile & internet, away from memories & thoughts. Talk to yourself & stay in a state of blank, interaction will automatically start. This needs practice. This is not meditation, but interaction. Be your own friend, no one understands you better than yourself. Befriend yourself and you'll never feel lonely. 

Practice this thought process and all problems will become very small and they won't trouble you anymore. As you now know their reason & solution now. And your ultimate Goal? No, that you yourself must discover. I know, you will :)

:: Priyank Singh Thakur

Thursday, August 25, 2011

thank you Team Anna

i am a common man, a person with no big goals, with no big concerns. i earn my living to fulfill my and my family's needs. i do love my Nation, but i didn't devote time and energy for its betterment. Yes, because i am a common man. No one told me about my responsibilities, no one taught me my duties, it was not even in my syllabus.

i read newspapers, i watch TV news, i even discuss things with my friends apart from our usual talks. No one expect us to protest, its the work of political parties & organizations. No one wants us to protest, ours is a democratic system where we can vote our government, that's all.

i pay bribe to get a "birth certificate", i pay bribe to get a passport, i pay bribe to get a train reservation, i pay bribe to a traffic constable. All this is part of my routine & part of our system, i suppose, so i don't complain.

i see an elected leader (Parshad, Sarpanch, MLA, MP, etc) growing rich & richer rapidly. May be God gets kind on them & luck favors them or they get a "magic wand" once they win. Whatever, i didn't complain, that's not my duty.

Now who is this Anna Hazare & Team Anna? Why have they awakened our Youth & every Bharatiya i/c Me? Why i am liking this added duty to work for MY Nation & make it corruption free? All this has given me a self-esteem and "i" have grown to become "I". Now on, I will work to make my Bharat corruption free so that MY Bharat develops much faster & eradicates poverty and bring down prices. And yes, I want MY money back from foreign banks ASAP.

I am part of this new Bharat, thank you Team Anna..

Wednesday, June 15, 2011

यदि मैं प्रधानमंत्री होता तो कैसा होता?

बहुत दिनों से, या यूँ कहूँ, जब से राजनीतिक होश संभाला है तब से यह सपना देखता आ रहा हूँ की मैं यदि प्रधानमंत्री होता, तो कैसा होता?

काश्मीर आतंकवाद का निबटारा & धारा 370 की समाप्ति, जन लोकपाल बिल को पास करवाना, अयोध्या- काशी- मथुरा को धार्मिक व नायायिक दृष्टि से हिन्दुओं को सौंपना, देश से आई.ए.एस के हाथों से सत्ता वापस विभागों के पास लाना और सारे कार्य प्रोफेशनल तरीके से कराना. 2 दलीय राजनीतिक संविधान लाना और प्रधानमंत्री का सीधे चुनाव कराना, आदि आदि. कितने काम करने हैं यारों. बस परमाणु ऊर्जा और बोईंग के सौदों का व्यापार करना ही उद्देश्य नहीं है मेरा.

प्रधानमंत्री माने की देश का सबसे ताकतवर व्यक्ति, माने की देश का सर्वोच्च शक्तिशाली पद (सर्वोच्च संविधानिक पद राष्ट्रपति का होता है, पर व्यावहारिक दृष्टि से प्रधानमंत्री ही सर्वोच्च पद होता है).. पर फिर कभी कभी ख्याल आता है की मात्र नाम का प्रधानमंत्री नहीं बनाना भाई, रबर स्टंप तो बिलकुल नहीं. वरना हाथ अट्ठन्नी भी नहीं आती और गालियाँ हजार सुननी पड़ती हैं. और अल्पमत सरकार तो बिलकुल भी नहीं, वरना सब्जी-भाजी जैसे सांसदों को कभी बस में बिठा के घुमाने ले जाओ, कभी सूटकेस थमाओ. और गठबंधन सरकार तो कभी भी नहीं, उस हालत में तो बेचारा प्रधानमंत्री उस पति जैसा होता है जिसकी 272 सासें उसके घर में आ कर बैठी होती हैं. 

मतलब की, मैं प्रधानमंत्री बनना भी चाहता हूँ, पर अपनी शर्तों पे. पूर्ण बहुमत के साथ, बहुमत भी तीन चौथाई. अब मैंने कुछ ज्यादा तो माँगा नहीं है! एक पदभार माँगा है, पूरे प्रभार और शक्ति के साथ. जो सारे सौदे, यानी के सारे निर्णय स्वयं ले. सारे कमीशन.. मतलब की, डिसीज़न उसके रहें. पर फिर एक खयाल आता है कि यदि प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में ले आये तो? छोड़ो यार, हम बेरोज़गार ही अच्छे ;)
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Thursday, April 28, 2011

Autobiography of Bharat Varsh.. Written in 2050

Part of my new article, still incomplete..

1)
"मेरी समृद्धि देख लुटेरी प्रजातियों ने मुझपर आक्रमण करने शुरू किये. यह वो समय था जब गुप्त साम्राज्य समाप्ति पर था और अरब में मुस्लिम कबीलों की शक्ति बढ़ रही थी. तुर्किश आतातायी ग़ज़नी ने काबुल पर कब्ज़ा कर मुझपर लगातार हमले करने शुरू कर दिए. राणा प्रताप जैसे वीर राजाओं ने दर्जनों बार मुगलों को बुरी तरह हराया, पर सहृदय होने के कारण हर बार मुगलों को दया कर छोड़ दिया, इस भूल का नतीजा अंततः उनकी हार से हुआ. कहा जाता है कि मुग़ल मुख्यतः भारत इसलिए आते थे क्योंकि वो सनातन धर्म को अपना दुश्मन मानते थे. इसी कारण जहाँ जहाँ सनातन धर्म के मंदिर थे, वहां वहां उन क्रूर लुटेरों ने पहले हमला कर मंदिरों को तोड़ा और लूटा. जब सोमनाथ का मंदिर तोड़ा गया, तब लगभग 50,000 हिन्दुओं ने उसकी रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया. "

2)"मेरी गौरवशाली गाथा सम्राट भरत और चन्द्रगुप्त से है, अशोक से है, महाराजा रघु से है, शिवाजी से है. लाखों वर्ष के इतिहास में एक भी उदहारण ऐसा नहीं है कि भारत ने कभी किसी अन्य देश पर आक्रमण किया हो या उसका दमन - शोषण किया हो.. पर सभी देश भारत नहीं होते, सभी धर्म सनातन नहीं होते."

3) "अंग्रेजों की देन हमारा जन्मजात शत्रु - पाकिस्तान, अपने जन्म के साथ ही भारत के लिए सबसे बड़ा शत्रु बन गया. मैं भारत, अपनी स्वाधीनता को अच्छे से समझ भी नहीं पाया था कि मेरे शीश कश्मीर के बारामुला नगर में पाकिस्तानियों ने और अफगानी लुटेरों ने आक्रमण कर दिया. यह लुटेरे ट्रकों में आये थे. इन्होने वहां एक दिन में इतने अत्याचार किये कि मेरा दिल टूट गया. हर आदमी को मार डाला गया, हर स्त्री का सतीत्व लूटा गया, जो भी लूट लायक मिला वो ट्रकों में भर के पाकिस्तान ले गए. देश में राज्यों का अधिग्रहण का काम चल ही रहा था, पर कश्मीर के महाराजा ने अभी तक विलय नहीं किया था. पर इस बर्बर हमले को देख कर रात को ही महाराजा रणजीत सिंह ने पूर्ण विलय की कार्यवाही पूरी करी. अगली सुबह वायुसेना के हमलों से पाकिस्तानी उलटे पाँव वापस भागे. पर हमारे प्रधानमंत्री ने युद्ध विराम कि घोषणा करते हुए कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र के हवाले कर दिया, कि हमारे देश का मामला आप सुलझाओ. हम युद्ध जीत गए थे, पर हारी हुई धरती पाकिस्तान के पास रहने दी कि संयुक्त राष्ट्र इसका निर्णय करेगा. यह मुस्लिम वोट तुष्टिकरण नीति की पहली भूल थी. "

friends.. This article is being modified, edited & still being written. Your suggestions are always welcome & needed..

regards.. : Priyank

Friday, April 15, 2011

qutub meenar is another Tejo Mahalay..

During my recent visit to Delhi (Dilli), i was not knowing that i would witness something that i never dreamed of, something contrary to what we were taught since childhood, something that all historians never argued. But again, i doubt, why a non-historian like me noticed so many things that all learned people ignored? or forced to ignore !! may be.. May be the same reason of not hanging the attacker of our parliament & mass murderer of 26/11.

Friends, all thanks to twitter and face Book where i came to know about all such things which our HRD ministry always tried to hide for their fake political mileage. here only i came to know about " YAMUNA STAMBH " for the 1st time & i argued with myself that this is rubbish. But when i went to Yamuna Stambh & i OBSERVED what i was hinted at, it was a shocker, a big shocker.

Yamuna Stambh, as even told in the Tourist Guide by Government of India, was built by King Prithviraj Chouhan for his daughter who used to offer her daily prayers to Yamuna river, it was for her to see Yamuna ji from this place. You are also thinking the same way as i thought of this whole idea, right? but think, why would a barbaric looter & general of muhammad ghori would built a monument in a place he knows he has to flee soon? more over, as told in tourist guide by government, it is said that the HINDU GODS are built by qutubuddeen because of influence of Brahmins, don't laugh dear, this is on record. Now no more write ups, look yourself and agree with me :-

1) Look at these Carvings, compare them with moghul architecture anywhere in this world. 



2) Look at these Hindu idols, tell me a single muslim place of worship. OK, leave worship place, any structure ever built by any muslim where they had Hindu idols built. Look :-



3) Now, you half agree with me that ok, there was a temple here & moghuls, like Ayodhya, Somnath, Mathura, Kashi, etc demolished this temple & built qutub meenar. So, here comes the final blow. in the following pictures, compare the carving on YAMUNA STAMBH. The original carving is Fine & Similar to other carvings on temple, but the other carving of urdu/ persian letters is done on a different surface, letters are rough & not anywhere comparable to original carving. See the surface, there must be Hindu Gods carved on this place which was leveled & these letters were pasted on this surface. Have a look :-





do i need to say anything more ? naa.. inne to samajhdar aap bhi ho.





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