मुतालिक की श्री राम सेना ने जो किया
सरासर ग़लत किया
ये सब हथकंडे सस्ती लोकप्रियता के अलावा कुछ नही देते..
वह भी अगर सामने वाला बदनामी को लोकप्रियता समझे , तब
इन सब कुकर्मो से इन कर्मो का उद्देश्य वाकई खटक जाता है
और उस को, विचारधारा के पुराने समर्थक भी साथ नही देते
यदि, राजस्थान के और कर्नाटक के मुख्यमंत्री पब कल्चर के खिलाफ वक्तव्य
देते तो उनको प्रशंसा मिलती. परन्तु, इस काण्ड के बाद उनके बयान
को मुतालिक के समर्थन के रूप मैं पेश किया जा रहा है
खैर
जो हुआ सो हुआ
नारी का अपमान, चाहे जो कारण हो
हिन्दुस्थान को मंजूर नही है
यह निंदनीय & सजा योग्य कार्य है
जय हिंद
Friday, January 30, 2009
मेंगलोर पब काण्ड
Tuesday, January 27, 2009
योग से ॐ को क्यों हटाएँ ?
आज फ़िर किसी घटिया देश ( इंडोनेशिया ) के घटिया संघठन ने योग को उनके देश में बंद करने का घटिया फरमान जारी किया. मेरा प्रश्न है कि ये साले होते कौन हैं योग के बारे में बात करने वाले ?
क्यों हम फ़िर से इंडोनेशिया जैसे तुच्छ देशों के आगे नम्रता से पेश आ रहे हैं? क्यों नरम छवी के चक्कर मैं अपना स्वाभिमान खोते जा रहे हैं ? कमजोर सरकार है, कमजोर धर्म नही; कमजोर अधर्मी हैं, और जब धर्म पंथी अपनी रक्षा और सम्मान के पक्ष मैं स्वर मुखर करते हैं तो उनको हिंदू आतंकवादी या हिंदू तालिबान कहा जाता है, जो की हिन्दुओं के ऊपर गाली से भी बड़ा लांचन है.
आज स्वामी राम्देओ जी ने यह कहा कि "योग को बंद न करें और ॐ के स्थान पर मुस्लिम ये ईसाई अपने भगवन का नाम ले लें"
क्या ये फेर बदल आवश्यक है ? यदि कुछ मुस्लिम या ईसाई योग नही करेंगे तो कोई आफत आ जाएगी ? उनके योग करने से क्या हिन्दुओं का शरीर स्वस्थ हो रहा है ?
कभी चर्च योग को बंद करता है कभी जिहाद .
एक बार हमारे योग गुरु या हमारी ढुल मुल सरकार ये कहने का सहस करे कि
" योग हिन्दुओं का copy write है, गैर हिंदू योग नही कर सकते" फ़िर देखो कैसा भूचाल आता है.
जिस भाषा मैं जो जानवर जो बात समझे, उसको वो ही भाषा मैं समझाना होगा.
हमारे यहाँ विडम्बना देखो, राष्ट्रीय टी वी चेनल पर मुस्लिम नेता आ कर योग के विरोध मैं बोल रहे हैं कि यदि ॐ और श्लोक अलग कर दें तो योग हमें मंजूर है.
अरे मूर्ख, पहले ये तो जान ले कि तू योग के काबिल भी है कि नही ? यदि ॐ ओउर श्लोक को योग से अलग कर दें तो योग मात्र शरीर रह जाएगा, आत्मा विहीन शरीर और धीरे धीरे हमारे धर्मनिरपेक्ष कांग्रेस नेता इस स्वरुप को पाठ्यक्रम मैं जोड़ लेंगे & हमारी आने वाली पीड़ी योग को बाबर का आविष्कार समझेगी.
धिक्कार है ऐसे कमजोर नेत्रित्व पर
पुनः
जय श्री राम
आपका अपना ही
एक और अपमानित बंधु
प्रियंक
Thursday, December 25, 2008
समझो नाम हो गया
मुझे नब्ज़ टटोलने की, यूँ ही आदत नही है
थामा भी जिसका हाथ, उसे आराम हो गया .
मेज के ऊपर किसी ने, क्या कभी काम किए हैं?
मेज के नीचे जो लिया दाम, उसका काम हो गया.
मृत्यु और विवाह पर, लोग बहुत हैं आते
मजमा लगे सुबह शाम, समझो नाम हो गया.
हालात बदलने में, कुछ ख़ास कर नही पाया
मुझ जैसा खास व्यक्ति, कैसे यूँ आम हो गया?
सौ कौवों के सरदार, एक कौवे ने कह दिया
हुए ही नही राम, राम राम हो गया.
ऐसी खौलती बातें, आशी तौल के लिखना
अखबार न लिखें, कि काम तमाम हो गया
आशी
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Friday, December 19, 2008
अब्दुल रहमान अंतुले
एक सोची समझी साजिश के चलते अब्दुल रहमान अंतुले ने स्व. करकरे की वीरगति को अपमानित कर पुनः हिन्दुओं पर अपमानजनक आतंकी टिपण्णी करी है.
इसको यह न समझा जाए की इस आदमी ने ये बात आवेश मैं आ कर या अनजाने मैं कही हो. अब्दुल रहमान अंतुले, जो कांग्रेस मैं बीसियों साल से रोटी सेंक रहा है, भूलवश ऐसी भद्दी टिपण्णी नही कर सकता. ऐसा उसने अपनी आका के इशारे पर किया है. अब कारवाही के नाम पर आचार संहिता लागू होने मैं जब ३ माह बचे हैं, तब इस आदमी को निलंबित भी कर दिया जाए तो क्या फर्क पड़ता है !
फर्क पड़ना चाहिए आपको & हमको. जो यह आसानी से भुला बैठते हैं की इस राजनेतिक दल ने निरंतर हिन्दुओं को अपमानित करने का काम किया है.
१- श्री राम जन्म भूमि पर ४०० वर्षों से लगातार हिंदू विरोधी काम करना,
२- श्री राम सेतु मुद्दे पर भगवन राम के अस्तित्व पर हलफनामा देना,
३- हलफनामे को वापस लेना & यह कहना की सेतु श्री राम ने स्वयम ही तोड़ दिया था,
४- बाबा अमरनाथ समिति को जमीन दे कर वापस लेना,
५- ओडिसा मैं स्वामी लक्ष्मणानंद जी के हत्यारों को संरक्षण & पुनः हिन्दुओं पर ही आरोप लगना,
६- साध्वी प्रज्ञा & अभिनव भारत को मलेगओं बोम्ब काण्ड मैं झूठा फ़साना & ऐ. टी. एस द्वारा रोज किसी भद्दी अप्रमाणित ख़बर को मीडिया द्वारा प्रसारित करना,
७- हिंदू आतंकवाद जैसा घटिया शब्द का आविष्कार करना
& अब स्व. करकरे की हत्या का आरोप लगना.
न्याय करने कलि अवतार जब आयेंगे तब आयेंगे.
नर्क में ये कपटी जो सजा पायेंगे सो पायेंगे.
अभी इनका निर्णय & निश्चय आपको करना है.
पुनः, गोल्डफिश की भाँती "आगे पाठ - पीछे सपाट" न हो, इनके कुकर्मो को याद रखें & सजा दें.
घर बैठे गुस्सा होने से कुछ नही होने वाला.
क्रोध ऐसा हो जो असर दिखाए.
जय श्री राम
प्रियंक ठाकुर
जबलपुर